Pages

Thursday, February 23, 2012

गुनगुनी धूप में




गुनगुनी धूप में बेतक्कलुफ़ से कुछ लम्हे 
मन को सहलाते हुए कहते हैं
ज़िन्दगी इतनी ग़मगीन भी नहीं की तेरे 
बगैर उम्र गुजारी भी न जा सके
जा तेरा इंतज़ार छोड़ दिया 
मेरे हाल की खबर मुझे नहीं 
पर तेरे हाल पर तुझे छोड़ दिया  
ज़िन्दगी में मेरी आये ना आये 
दुआ है तेरी ज़िन्दगी में 
पतझड़ भी आये तो वसंत की तरह 

No comments:

Post a Comment