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Thursday, January 13, 2022

हिंदी दिवस

 बोल चाल में रहने दो

साहित्य से श्रृंगत होने दो

हर दिवस हिंदी हिंदी हो जाएगा 

इसे जन मानस में बसने दो।।


सूर रसखान जयसी के पद से 

निराला दिनकर के काव्य तक 

शुद्ध अशुद्ध का भेद विचारकों को करने दो

शिशु मुख की बोली से आह्लादित 

मातृ रस भरी लोरी के स्वर में इसे रचने दो ।


हर दिवस हिंदीं हिंदी हो जाएगा

इसे जन मानस में बसने दो।


मनीषा वर्मा

#गुफ्तगू



लोहड़ी


एक ख़त मेरे मायके के नाम


उस आंगन में फिर गूंजी होगी ढोलक की थाप

किसी ने फिर जलाई होगी लोहड़ी की वही आग।। पड़ोस की भाभियों ने गाए होंगे गीत और टप्पे

बढ़ बढ़ के बच्चों ने मचाया होगा हंगामा ।।


गली के नुक्कड़ पर बटी होंगी किस्से कहानियों की रेवड़ियां

तुम्हारी आंखों में भी तो वो मंजर पिघल आया होगा ।।


फिर वही पुराना मौसम तुम्हे भी तो याद आया होगा 

मोहल्ले की उन गलियों में जिक्र हमारा भी तो आया होगा ।।


मनीषा वर्मा 


#गुफ़्तगू

Thursday, January 6, 2022

हम जो भंवर में उगे

 हम जो भंवर में पले भंवर में ही रह गए

ना ज़मीं तक पहुंचे ना आसमां छू सके ।।


तूफ़ान ही नसीब थे तूफान ही मिले

ना तिनके मिल सके ना सहारा बन सके ।।


लिख कर मिटाते रहे जी कर मिटते रहे 

ना अपनी कह सके ना उनकी सुन सके ।।


मनीषा वर्मा 

#गुफ़्तगू