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Thursday, January 2, 2020

झूठ

घात  प्रतिघात आघात
क्षण क्षण अंतर्नाद
दायरे  बस केवल दायरे
मान  के
मर्यादा के
अहं  के
दायरे
झूठ और सिर्फ झूठ
प्यार झूठ मान झूठ
संबंध बनावट
मनुहार बनावट
कैसे जिए जाएं ये
इतने सारे  बंधन
आह! अंतर्नाद मूक अंतर्नाद
दव्न्द  विध्वंस दव्न्द 
आह ! आह! आह!
 मनीषा वर्मा