इश्क़ पर वसंत आया है
तुम्हें साथ ले आया है
फूलों की गंध में
मिल चुकी है तुम्हारे
लौट आने की खुशबू
पपीहे ने फिर तुम्हे
पुकारा है
तुम्हारी याद ने घर आंगन
महकाया है
तुम्हारे लौट आने का
मौसम आया है
यह हवा ने फिर
किवाड़ खटखटाएं है
तुम्हारी पदचाप सुनने को
सरसों के खेत
लहराएं हैं
तुम्हारे आने का मौसम
लौट आया है
गांव घर की गलियों में
रंग संवर आया है
तुम्हें फिर
फाल्गुन ने पैगाम
भिजवाया है
तुम्हारे लौटने का
मौसम फिर आया है।।
मनीषा वर्मा
#गुफ्तगू