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Tuesday, September 8, 2026

एक दर है जो छूटता नहीं

 एक दर है जो छूटता नहीं 

है एक पल जो बीतता नहीं 

वक़्त गुज़रता जाता है 

पर समय बीतता नहीं ।।


उसी मुहाने पर खड़े हैं 

जहाँ से कोई गुजरता नहीं 

कोई बात तो है सबके ज़हन में

पर कोई पूछता नहीं ।।


इस फ़िज़ा में एक चुप सी लगी है

कोई अब हमें क्यों पुकारता नहीं 

तेरे शहर में हम हो गए मुसाफ़िर

कोई यहां अब अपना लगता नहीं ।।


मनीषा वर्मा 

#गुफ्तगू

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