मेरी डायरी के कुछ पन्ने
माटी कहे कुम्हार से तू क्या रुँधे मोए इक दिन ऐसा आयेगा मैं रुँधूगी तोए
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Tuesday, March 4, 2025
उन्हें याद तो आई होगी
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उन्हें याद आई तो होगी, आंख भर आई तो होगी एक हूक सीने से उठ तो आई होगी।। कोई ज़िक्र तो मेरा किसी ने छेड़ा होगा, एक याद कोने में मुस्कुराई त...
Monday, March 3, 2025
तेरे पास जो मेरे लम्हे हैं उन्हें सम्भाल कर रखना
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तेरे पास जो मेरे लम्हे हैं उन्हें सम्भाल कर रखना तेरी तन्हाइयों में तेरा दिल बहलाएँगे जब ज़िंदगी में तेरे अपने साथ होंगे, महफिल होगी जाम ...
तुमने बंद कर दिए तुम तक आने के सब रास्ते
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तुमने बंद कर दिए तुम तक आने के सब रास्ते अब किस हवाले से हक जताते हो।। मैं कोई पुराना वृक्ष नहीं आंगन का जो प्रस्तुत हो रहूं हर प्रहार ...
वसंत का रंग लाल है
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इस बार माघ में उग आईं हैं मानुष पर कंटीली झाड़ियां जो आस पास चलते हुए उनके हमरूपों को लहूलुहान किए दे रहीं हैं।। यह रंगों भरे फाल्गुन मे...
Thursday, February 20, 2025
मुसाफिर रे!
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मुसाफिर रे !यह जग रैन बसेरा कौन जाने कहां तेरा ठिकाना ? बांध ले अपने सपनों की गठरी हर पल आना जाना छूटे बंधु छूटे अपने कौन जाने क्या रहा अपन...
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