Pages

▼

Saturday, July 12, 2014

ज़िंदगी की दोपहर

ज़िंदगी की दोपहर में
कुछ दुःख तेरे होंगे
कुछ गम मेरे हैं
चल मिल कर बाँट ले
अपनी अपनी खुशियां
मनीषा  

No comments:

Post a Comment