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Wednesday, September 30, 2026

बातें रह जाती हैं

बातें रह जाती हैं चंद मुलाकाते रह जाती हैं

उम्र फिसल जाती है हाथों से 

बस यादें रह जाती हैं 


कुछ पुकार के नाम रह जाते हैं 

दोस्तों के बीच लगे ठहाके रह जाते हैं

अभी तो यहीं थे

कल ही तो मिले थे 

बस बातें रह जाती हैं 


कोई आँचल गीला सा रह जाता है

तन के कपड़े मन के बोल रह जाते हैं

एक अधूरी गुनगुनाई धुन

रह जाती है 

एक चश्मा एक रुमाल एक कलम रह जाती है

वक्त गुज़र जाता है 

एक रुकी सी घड़ी रह जाती है


उम्र फिसल जाती है हाथों से 

बस यादें रह जाती हैं 


मनीषा वर्मा 

#गुफ्तगू

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