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Saturday, March 28, 2015

लिखना है तो दिल की बात लिखो

लिखना है तो दिल की बात लिखो 
सूनी राहें तकते 
सूखे जो आँसू नम आँखों में 
उसकी याद लिखो 
लिखना है तो उन कांपती हथेलियों की 
सिरहन की बात लिखो
लिखना है तो
रात के सन्नाटों में उठती
हूक की बात लिखो
उन बूढ़ी बातों से झरते
प्यार की बात लिखो
लिखना है तो मन पर जो
अपने जाए ने जो दिए
आघात उसकी बात लिखो
लिखना है तो चोट खाए माँ के दिल से
निकले आशीष की बात लिखो
मनीषा

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