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Sunday, December 15, 2013

एक फरियाद

फिर पुकार मुझे
चुपके से  ले  मेरा नाम
डूब रही हूँ अपने ही मन के अंधेरों में
अपनी लौ से कर दे रौशन मुझे

बहुत झूठ जी चुकी हूँ
आज तेरे सच में जीने का हौसला हुआ है
तेरी बाँहो  के लिए तड़पी हूँ बेइंतहा
अपने आगोश में छिपा ले मुझे

तेरा साथ तो एक ख्वाब सा है
जानती हूँ फिर भी
मेरे ख्यालो में गुम हो जा और
अपने ख्वाबों में बसा ले मुझे 

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